Sandesh

“खेतों का राजा (किसान) आज बजार का गुलाम हो चुका है”

“अपनी खेती अपनी खाद ,अपना बीज अपना स्वाद ”

” किसान देश की धड़कन है”

“लागत के साथ मिले उत्पाद का पूरा पूरा लाभ”

“कृषि प्रधान देश में अगर किसान ही उपेक्षित है तो सर्वनाश निश्चित है”

“किसान को राजनीत का मोहरा बनाकर खेले जाने वाला घिनौना खेल बंद होना चाहिये”