वृक्षों के बिना जीवन जीने का सोचना एक कोरी कल्पना है|

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हमारे जीवन में वृक्षों का भी एक महत्वपूर्ण स्थान है परंतु आधुनिक सोच और लोगो के गिरते बौद्धिक स्तर का दुष्परिणाम रहा है कि आज हर जीव जन्तु पर्यावरण के असंतुलित होने का गवाह बनता जा रहा है ,असमय जलवायु परिवर्तन और आते जा रहे जल संकट इसके ताजा उदाहरण हैं ।पहले बहुत मात्रा में पेड़ और वृक्ष जंगल के रुप में धरती पर मौजूद थे पर इंसानों ने इनसे होने वाले फायदे के बारे में जानते हुऐ भी तकनीकी व्यवस्था को ऊपर करने में वृक्षों की बेरहमी से कटाई शुरू ,कहीँ ज़मीन बढ़ाने को लेकर तो कहीँ.उद्योग बैठाने के लिये वृक्षों और जंगलो को साफ किया ,परंतु आने वाली समस्याओं की तरफ़ ध्यान नही दिया गया ,वृक्षों की कटाई से प्रकृति को असंतुलित होने से रोकने के लिये कोई भी उपाय नही किया गया और न ही नये वृक्षों को लगाया गया इसका भयानक असर ऐसा पड़ा कि वृक्षों की कटाई से असमय मानसून होता गया ,कहीँ सूखा तो कहीँ पानी और तो और जीने के लिये जरूरी आक्सीजन की भी प्रचुर मात्रा में कमी होती गयी और श्वास सम्बन्धी बीमारियों का प्रचलन बढ़ता गया ।इन व्याप्त सजीव महामारियो के बावजूद भी कोई सबक लेने को तैयार नही. वृक्षों व जंगलों से हमे शुध्द हवा ,फल ,फूल, नियंत्रित मानसून ,स्वास्थ्य वर्धक जड़ी बूटी एवम गाँव व ग्रामीण अंचलों को खाना बनाने के लिये अत्यधिक मात्रा में लकड़ी जो कि जलाने के काम आती थी और पशुओं के लिये भरपूर चारा मिल जाता था ,जिसके चलते लोग वृक्षों और जंगलों की हिफाजत किया करते थे ,किंतु जब से विज्ञान का गलत इस्तेमाल सुख सुविधाओं की वृद्धि में किया जाने लगा तब से पर्यावरण प्रदूषित और वृक्ष एवम जंगल काटना लोगो की पहली प्रथमिकता बनता चला गया ।अजीब लगता है !! यह जानकर कि कूछ दशक पूर्व एक व्यक्ति पर कई वृक्ष हुआ करते थे जिससे उन्हे प्रचुर मात्रा में ज़रूरत से ज्यादा शुद्ध हवा मिलती रहती थी और बीमारियाँ कोसो दूर रहती थी पर आज कैसी हों गयी कि एक वृक्ष के ऊपर कई व्यक्ति निर्भर हों चुके हैं ।इससे शुध्द हवा की होती जा रहीं कमी और बीमारियों का भरमार फैलता जा रहा है ।पर्यावरण को सही रास्ते पर लाने के लिये सरकार को भी सही पहल करना जरूरी है क्योंकि इससे ज्यादा लापरवाही बरतने से धरती पर जीवन बचा पाने की सोचना ख्याली पुलाव होगा ।क्योंकि न रहेंगे वृक्ष ,न बचेगा जीवन ॥

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