जल है तो कल है !!!!

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SRI_Weeding
आज की सबसे ज्वलंत समस्या जो है वह है भूगर्भ के जल स्तर की कमी और साल दर साल पड़ने वाले सूखे जिससे कि सबसे ज्यादा प्रभावित कोई होता है, तो वह है किसान और ग्रामीण अंचल ,परंतु यह समस्या सिर्फ एक दिन में तो खड़ी हुई नही होगी ? क्योंकि यह सत्य है कि इस भयावह जल समस्या की शुरुआत कई वर्षों या दशकों पूर्व हुई होगी ! फ़िर भी इसकी तरफ़ ध्यान नही देना उस समय की लोकतांत्रिक सरकारों की विफलता को दर्शाने के लिये काफी है पर अब दोष देने के बजाय इसके स्थायी निदान पर ध्यान दिया जाना बहुत जरूरी है , क्योंकि जल संकट और मानसून का असमय आना इस सृष्टि के विनाश का कारक है फ़िर भी ऐसा नही है कि धरती के जल स्रोतों को संरक्षित न किया जा सके ! मुश्किल और कठिनाई युक्त तो है इस वर्तमान परिस्थिति को देखते हुऐ परंतु नामुमकिन नही है क्योंकि ‘जल के साथ ही जीवन है ‘ इस बहुमूल्य जीवन जो प्रकृति ने दिया है उस समस्त प्राणियों की रक्षा हेतु जल बचाना जरूरी है । इसके लिये सरकार और अन्य राजनैतिक दलों को एक साथ आकर अपनी जिज्ञासा एवम बेवजह के मुद्दों से हटकर जल संरक्षण के स्थायी संचय व वृद्धि पर अपनी एक सार्थक सोच लागू करके उसका क्रियान्वयन कराने पर जोर देकर इस आयी हुई विकट विपदा से देश के गाँव और किसानों को मुक्त कराने का काम करना चाहिये । यह भी एक अकाट्य सत्य है कि जप प्रकृति से असमय छेड़छाड़ किया जाता रहा दुष्परिणाम की परवाह किये वगैर उसका भी असर तो हम सबको भोगना ही पड़ेगा ॥ जय किसान

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