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खेतों का राजा (किसान) आज बाजार का गुलाम हो चुका है

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बहुत ही आश्चर्य होता जब अपना खून पसीना एक करके चाहे वह चिलचिलाती धूप हो,मूसलाधार होती हुई बारिश या हो हाड़ कँपाने वाली ठंड इन सबका परवाह किये बिना किसान आम जनमानस के लिये अपना जी जान लगा देता है अन्न उत्पादन में , पर आघात तब लगता है जब दिशाहीन हमारी कृषि नीति के […]

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किसानों को लोभ के मकड़जाल में फंसाने को बेताब होने लगी राजनीतिक पार्टिया

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कई प्रदेशों में विधान सभा का चुनाव आने वाले समय में होने जा रहा है ,चुनाव से पूर्व मृतप्राय अवस्था में जीवन जीने के लिये मजबूर हुए किसान और मजदूर किसानो की सुधि लेने वाला कोई नही दिखा परंतु चुनाव का समय नज़दीक आने पर हर ओर से सत्तालोभी संगठनो का किसान प्रेम चिंता का […]

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वृक्षों के बिना जीवन जीने का सोचना एक कोरी कल्पना है|

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हमारे जीवन में वृक्षों का भी एक महत्वपूर्ण स्थान है परंतु आधुनिक सोच और लोगो के गिरते बौद्धिक स्तर का दुष्परिणाम रहा है कि आज हर जीव जन्तु पर्यावरण के असंतुलित होने का गवाह बनता जा रहा है ,असमय जलवायु परिवर्तन और आते जा रहे जल संकट इसके ताजा उदाहरण हैं ।पहले बहुत मात्रा में […]

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कृषि और किसान की ऐसी दुर्दशा क्यों और कब तक बर्दाश्त किया जाय ||

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कभी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहीँ जाने वाली कृषि आज अपनी बदहाली पर आँसू बहातीं नज़र आ रहीं है और अन्नदाता (किसान) सरकर की दोगली नीतियों के चलते अपनी लाचारी पर खुद को कोसता हुआ जिंदगी को बोझ बना बैठा है ,आखिर किसान की समस्याओं का समाधान क्यों नही किया जा रहा है जिससे […]

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जल है तो कल है !!!!

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आज की सबसे ज्वलंत समस्या जो है वह है भूगर्भ के जल स्तर की कमी और साल दर साल पड़ने वाले सूखे जिससे कि सबसे ज्यादा प्रभावित कोई होता है, तो वह है किसान और ग्रामीण अंचल ,परंतु यह समस्या सिर्फ एक दिन में तो खड़ी हुई नही होगी ? क्योंकि यह सत्य है कि […]

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किसानों को चाहिये लागत के साथ पूरा पूरा लाभ

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राष्ट्रीय किसान आंदोलन के संयोजक श्री नीरज राय ने कहा कि गाँव ,किसान और कृषि की अनदेखी का ही दुष्परिणाम है कि किसान खेतों से दूर भाग रहा है शहरों की तरफ़ और जो बचे हैं वो खेतों में खेती करते हुए कर्जे के बोझ तले दम तोड़ने को मजबूर है और किसान परिवार खुद […]

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राष्ट्रीय किसान आंदोलन की मजबूती पर चर्चा

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      आज होटल ली मेरिडियन (दिल्ली) में बड़े भाई श्री सुखबीर सिंह हुड्डा( हरियाणा )के साथ राष्ट्रीय किसान आंदोलन के विस्तार हेतु विस्तृत चर्चा हुई ॥मेरे द्वारा किसान,कृषि और गाँव के बारे में विधिवत परिचर्चा करने के बाद सुखबीर जी ने इस आंदोलन को नया आयाम प्रदान करने की कूछ युक्ति भी हमे […]