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खेतों का राजा (किसान) आज बाजार का गुलाम हो चुका है

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बहुत ही आश्चर्य होता जब अपना खून पसीना एक करके चाहे वह चिलचिलाती धूप हो,मूसलाधार होती हुई बारिश या हो हाड़ कँपाने वाली ठंड इन सबका परवाह किये बिना किसान आम जनमानस के लिये अपना जी जान लगा देता है अन्न उत्पादन में , पर आघात तब लगता है जब दिशाहीन हमारी कृषि नीति के […]